शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

'भारतीय मुस्लिम अस्मिता' और 'राष्ट्रवादी मुस्लिम संगठन'

डॉ. रंजन ज़ैदी-लेखक 
ब अत्यंत भद्दी,  बदसूरत और मक्कार सूरतों वाले सियासी लोगों की आवाज़ें गली गलियारों से लेकर निजी मीडिया-चैनलों के पर्दों  पर भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देने, बाबर, हुमायूँ की माँ-बहन की ऐसी-तैसी कर देने और खोखले राष्ट्रवाद के नाम पर प्रचारतंत्र बाइकों पर भगवे झंडे लहराता हुआ चोर-सिपाही का खेल खेलता हुआ कथित  हिंदूवाद  की दीवार की ओट के सहारे  दंगों की आग भड़काकर इतिहास व राजनीतिक दलों और समूचे जातिवाद को नसीहतें देने लग जाए तो समझ लेना चाहिए  कि चुनाव ने अवाम के दरवाज़ों पर दस्तकें देनी शुरू कर दी हैं. 


ब सियासी लोगों की आवाज़ें गली गलियारों से लेकर निजी मीडिया-चैनलों के पर्दों  पर भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान भेज देने और खोखले राष्ट्रवाद के नाम पर नसीहतें देने लग जाए तो समझ लेना चाहिए  कि चुनाव ने दस्तकें देनी शुरू कर दी हैं. 

      उभरती नई राजनैतिक परिस्थितियों में दबे स्वरों से उभरते-उभरते अब खुलकर दो ऐसे सामाजिक मुस्लिम संगठन ('राष्ट्रवादी मुस्लिम संगठन' और 'भारतीय मुस्लिम अस्मिता') सामने आये हैं जो अपनी हेल्प-लाइनों के द्वारा देश के किसी भी क्षेत्र में धार्मिक चरमपंथियों द्वारा किये जा रहे हमलों, अत्याचारों और ज़्यादतियों के विरुद्ध सूचना पाते ही क़ानूनी कार्यवाई करने के लिए सक्रिय होने की तैयारी  कर चुके हैं. बताया जाता है कि इन दोनों सामाजिक संगठनों के स्वयंसेवी नियोजित रूप से पीड़ितों से मिलकर उन्हें तुरंत क़ानूनी सुरक्षा प्रदान करने की भी व्यवस्था करेंगे. इन संगठनों की क़ानूनी इकाइयों के सदस्य मुस्लिम समुदायों, दलितों  व पिछड़े वर्गों के आमजन में चेतना फैलाने के उद्देश्य से भारतीय संविधान में दिए गए अधिकारों की उन्हें पूरी जानकारियां उपलब्ध कराने  का भी काम करेंगीं।

      'राष्ट्रवादी मुस्लिम संगठन' के प्रवक्ता के अनुसार मुसलमानों की खामोशी को देश के धार्मिक चरमपंथियों ने उनकी कमज़ोरी समझा और एक के बाद एक करके वारदातें अंजाम देते चले गए. ताज़ा वारदातों में कासगंज दंगा भी एक है. मुसलमानो की ख़ामोशी को कमज़ोरी समझा गया जिससे लाभ उठाकर पुलिस-प्रशासन के सामने दंगाई वारदातें करते रहे. मुसलमानों के विरुद्ध दुष्प्रचार के माध्यम से भी और धार्मिक उन्माद के भीड़-तंत्र की आंड में भी उनका उत्पात हर तरफ जारी रहता है. हद यह हुई कि बीजेपी और आरएसएस के विभिन्न संगठनों के द्वारा भी मुसलमानों और इस्लाम के वैयक्तिक क़ानूनों पर हमले किये जाने लगे. तलाक़ से जुड़े क़ानून भी उनमें से एक है. जिसमें बताया गया कि तीन तलाक़ संविधान के खिलाफ है. AIMPLB यानि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड  के प्रवक्ता मौलाना सज्जाद नौमानी के